जालंधर बंध | जालंधर बंध के लाभ

Jalandhar Bandh benefits in Hindi

जालंधर बंध कैसे करे ?

पद्मासन या सिद्धासन में सीधे बैठकर श्वास को अंदर भर लें। दोनों हाथ घुटनों पर टिके हुए हों। अब ठोड़ी को थोड़ा नीचे झुकाते हुए कंठकूप में लगाना 'जालंधर बंध' कहलाता है। दृष्टि को भ्रूमध्य में स्थिर करें। छाती आगे की ओर तनी हुई होगी। यह बंध कण्ठस्थान के नाड़ी - जाल को बाँधे रखता है। 

जालंधर बंध के लाभ :

  • कंठ मधुर , सुरीला और आकर्षक होता है। 
  • कंठ के संकोच द्वारा इड़ा , पिंगला नाड़ियों के बंद होने पर प्राण का सुषुम्णा में प्रवेश होता है। 
  • गले के सभी रोगों में लाभप्रद है। थयरॉइड , टॉन्सिल आदि रोगों में अभ्यासनीय है। 
  • विशुद्धि - चक्र की जागृति करता है। 
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