मूलबन्ध

Benefits of Mulbandha in Hindi
मूलबंध 

मूलबन्ध कैसे करे ?

सिद्धासन या पद्मासन में बैठकर बाह्य या आभ्यन्तर कुम्भक करते हुए , गुदाभाग एवं मुतेंद्रियों को ऊपर की ओर आकर्षित करें। इस बंध में नाभि के नीचेवाला हिस्सा खिंच जाएगा। यह बंध बाह्यकुंभक के साथ लगाने में सुविधा रहती है। वैसे योगाभ्यासी साधक इसे कई - कई घण्टों तक सहजावस्था में भी लगाए रखते है। दीर्घ अभ्यास किसी के सान्धिय में करना उचित है। 

मूलबन्ध के लाभ :

  • इससे अपान का ऊध्र्वगमन होकर प्राण के साथ एकता होती है। इस प्रकार यह बंध मूलाधार चक्र को जागृत करता है और कुण्डलिनी - जागरण में अत्यंत सहायक है। 
  • कोष्ठबद्धता और बवासीर को दूर करने तथा जठराग्नि को तेज करने के लिए यह बंध अति उत्तम है। 
  • वीर्य को ऊध्वर्गामी बनाता है , साधक को ऊध्र्वरेता बनाता है। अतः ब्रह्मचर्य के लिए यह बंध महत्त्वपूर्ण है।  
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