उड्डियान बंध

Uddiyan ke laabh

उड्डियान बंध कैसे करे ?

प्राण जिस क्रिया से उठकर , उत्थित होकर सुषुम्णा में प्रविष्ट हो जाए उसे 'उड्डियान बंध' कहते है। खड़े होकर दोनों हाथों को सहज भाव से दोनों घुटनों पर रखिए। श्वास बाहर निकालकर पेट को ढीला छोड़े। जालंधर बंध  लगाते हुए छाती को थोड़ा ऊपर की ओर उठायें। पेट को कमर से लगा दें। यथाशक्ति करने के पश्चात पुनः श्वास लेकर पूर्ववत दोहरायें। प्रारम्भ में तीन बार करना पर्याप्त है। धीरे - धीरे अभ्यास बढ़ाना चाहिए। 

उड्डियान बंध के लाभ :

  • पेट - सम्बन्धी समस्त रोगों को दूर करता है। 
  • प्राणों को जागृत कर मणिपुर चक्र का शोधन करता है। 
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