Street Play in Hindi

नमस्कार मित्रों ! आज के इस लेख में हम आपको बताएँगे कि नुक्कड़ नाटक जिसे अंग्रेजी में street play भी कहा जाता है , क्या होता है ? साथ ही इससे जुडी सारी जानकारी भी देंगे आपको कि इसके क्या लाभ है , या कोई कलाकार अगर इसे करना चाहे तो वह कैसे इसे कर सकता है ? कितने रूपए मिलते है ? और ऐसे ही तमाम जानकारी भी देंगे। तो चलिए शुरू करते है। 

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नुक्कड़ नाटक क्या होता है ? What is Street Play ?

अस्सी और नब्बे के दशक में भारत में नुक्कड़ नाटक का विस्फोट सा हुआ। एक अध्यन के मुताबिक भारत में करीब सात हजार नुक्कड़ नाटक समूह है। इनमे से अधिकांश पश्चिम बंगाल , केरल , आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में है। इसमें शिरकत करने वाले लोगों में सोशल एक्शन ग्रुप , स्वास्थ्य और कृषि प्रसार कर्मी , छात्र समूह , राजनीतिक दल , धार्मिक सुधारक और महिला संगठन रहते है। 

नुक्कड़ नाटक का आरम्भ चालीस के दशक में राजनीतिक थिएटर से देखा जा सकता है। इसकी जड़े पारंपरिक नाट्यकला में नहीं है , लेकिन वह भारतीय समन्वयवादी दर्शन का प्रतीक है , जिसके तहत पश्चिम का प्रोसेनियम थिएटर भारत में बखूबी अपनाया गया। आरम्भ में इस पर वामपंथ हावी था। सड़कों पर इसे खेले जाने का अहम कारण यह था कि आम पंच राजनीतिक मामलों से दूर रहते थे। इसके आलावा यह वास्तविक घटनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति करता था , जनभाषा का इस्तेमाल करता था और बेहद कम जरूरतों से काम चलाकर आयोजित हो जाता था। 1944 में इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन के संस्थापक बिजन भट्टाचार्य ने संभवतः पहला नुक्कड़ नाटक 'निबान' खेला , जिसमे जमींदारों द्वारा किसानों के शोषण को जबरदस्त अभिव्यक्ति दी गयी। राजनीतिक रूप से सक्रिय अन्य दलों ने हाशिये पर पड़े लोगों को अधिकार दिलाने के लिए कई अच्छे नुक्कड़ नाटक खेले। दिल्ली में नुक्कड़ नाटक खेलते समय इष्टा के स्तंभ सफदर हाश्मी की हत्या हो गयी लेकिन इस घटना ने इस कला को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। 

नुक्कड़ नाटक के क्षेत्र में काफी बड़ा नाम है - बादल सरकार। उन्होंने इसे प्रतिबद्धता के थिएटर के तौर पर प्रस्तुत किया। वह ग्रोथोवस्की के पुअर थिएटर आगस्तो बोअल के वंचितों के थिएटर , शीक्नर के पर्यावरण थिएटर से प्रभावित थे। सरकार ने देह भाषा और जनता पर केंद्रित संवादों के क्षेत्र में प्रभावी कार्य किया। यह भी देखा गया कि नुक्कड़ नाटक स्थानीय कलाओं जैसे नृत्य संगीत और स्थानीय भाषा को अपने में समाहित कर लेता है। मिसाल के तौर पर बड़ोदा का नाट्य समूह सहियार गरबा और भवाई का प्रयोग करता है। आंध्र की जन नाट्य मंडली ओगर रथ का प्रयोग करती है। 

दिल्ली , मुंबई , ग्रामीण आंध्र , केरल और महाराष्ट्र के नुक्कड़ नाटक समूह महिला , शोषण , गरीबी , भेदभाव अशिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर ध्यान खींच रहे है। केरल में साक्षरता और वैज्ञानिक सोच के प्रसार में नुक्कड़ नाटक ने अहम भूमिका निभाई है। 

नुक्कड़ नाटक में कैसे काम करें ? How To Get Into Street Play ?

Nukkad Natak Kaise Kiya Jata Hai - How To do Street Play

नुक्कड़ नाटक में काम करने के लिए कुछ ख़ास एक्टिंग स्किल्स की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन हाँ , स्पीकिंग स्किल्स का होना अत्यंत आवश्यक है। और आपकी आवाज में दम होना चाहिए क्योंकि नुक्कड़ नाटक आमतौर पर गली - मोहल्ले में किया जाता है। इसलिए , आपके आवाज में इतना जान होना चाहिए कि पूरे गली में आपका आवाज गूँज उठे। 

अब सबसे मुख्य बात , नुक्कड़ नाटक करने के लिए आपको नुक्कड़ नाटक के ग्रुप को ज्वाइन करना पड़ेगा। अब ज्वाइन कैसे करे ? ये प्रश्न आपके मन में जरूर आया होगा। तो देखिए , ऐसा है आप ऐसे लोगों के संपर्क आइए जो इसमें काम करते है। अब जैसे मेरे केस में , मैंने जहाँ से एक्टिंग  सीखा था वहां से जान - पहचान के माध्यम से मुझे इसमें काम करने का मौका मिला। 

अब अगर बात करें कि इसमें एक एक्टर को कितने रूपए मिलते है तो देखिए ये 500 - 2000 के बीच में प्रतिदिन के हिसाब से हो सकता है। 

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